क्या गलत जांच पर चार्जशीट रद्द कराई जा सकती है?
हमारी पुत्रवधू पिछले तीन महीने से पढ़ाई करने के लिए अपने मायके में रह रही थी, जहाँ उसने आत्महत्या कर ली। इस मामले में मृतका के पिता ने अपनी तहरीर और पुलिस रिपोर्ट में ससुराल पक्ष के (1) पति, (2) सास, (3) ससुर तथा (4) शादीशुदा ननद को आरोपी बनाया है। विवेचना अधिकारी ने तहरीर एवं पुलिस रिपोर्ट में दर्शाई गई बातों के संबंध में न तो कोई ठोस जाँच की है और न ही किसी प्रकार की पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल सर्टिफिकेट, पंचायती फैसला, मारपीट, दहेज की मांग अथवा क्रूरता से संबंधित साक्ष्य एकत्र किए हैं। घटना की तिथि, समय तथा परिस्थितियों की भी विधिवत जाँच नहीं की गई है, फिर भी इससे संबंधित चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी गई है। अब मुख्य आरोपी (पति) की फाइल अलग करके सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दी गई है। सत्र न्यायालय के पैरोकार द्वारा विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर केस में आरोप (चार्ज) फ्रेम करवाने की बात कही जा रही है। हमें अपने इस मामले के संबंध में उचित कानूनी सलाह चाहिए। कृपया हमें समय प्रदान करने की कृपा करें।
आप तुरंत किसी अनुभवी क्रिमिनल वकील से सलाह लेकर कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन दाखिल करें, क्योंकि बिना ठोस सबूत के चार्जशीट दाखिल की गई है। साथ ही हाई कोर्ट में निष्पक्ष जांच या केस रद्द करने की पिटीशन लगाई जा सकती है। अपने पक्ष के सभी दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड और गवाहों को सुरक्षित रखें ताकि अपना बचाव मजबूत किया जा सके। अधिक कानूनी सहायता के लिए हमारी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।
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